CORONAVIRUS
कोविड -19 एक समस्या जिससे सुरक्षा ही बचाव है। covid -19 एक महामारी का रूप ले चूका है। WHO इसे दो माह पूर्व ही महामारी घोषित कर चुका है।
कोरोना ने स्वास्थ के साथ साथ शिक्षा , अर्थव्यवस्था , पर बहुत ही गहरा प्रभाव डाला है।
लोकडाउन के कारण किसी समय आबाद रहने वाले पर्यटन स्थल , मॉल, आदि वीरान पड़े है। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह डगमगा गयी है।
सरकारे राहत पैकेज ला रही है, परन्तु यह ' ऊट के मुँह में जीरा ' साबित हो रही है।
चूकि एक सरकारी और स्थायी रोजगार प्राप्त व्यक्ति को लॉकडाउन से कोई डर नहीं है। क्योकि उनका वेतन तो महीने के अंत में बैंक खाते में आ ही जायेगा जिसका वे तथा कथित ऑनलाइन सुविधाओं में उपयोग कर लेंगे
लेकिन क्या होगा उन दिहाड़ी मजदूरों का , ठेले वालो का जिनका एक वक्त का चूल्हा भी दिनभर में कमाई गयी कुछ चवनियो से जलता है।
भारत जैसे देश में एक तिहाई जनसँख्या इसी प्रकार की है , तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
आज जरूरत है ऐसे स्वास्थ एवं राहत पैकेज की जिसका उद्देश्य राजनैतिक सुर्खिया न बटोरकर जन - मानस का भला करना हो।
चीन , इटली,अमेरिका , स्पेन जैसे विकसित देश भी इस बीमारी के आगे घुटने टेक चुके है ,किन्तु जापान में आज भी संक्रमण की डर काफी कम है। कारण है वहाँ का मास्क कल्चर तथा haginic व दुनिया सांस्कृतिक रुप में अलग थलग रहने की उनकी प्रवति।
सन 2008 में आयी ऐच 1 ऐन 1 स्वाइन फ्लू बीमारी ने वहाँ के लोगो में मास्क लगाने को आदत बना दिया जिससे वे आज भी सार्वजनिक जगहों पर मास्क लगा कर जाते है ,तथा इस भयंकर महामारी से लगभग बचे हुए है।
पता लगने के इतने दिनों बाद भी इसका कोई इलाज या वैक्सीन न होना भी चिंता का विषय है। तथा इसकी भयानकता को प्रदर्शित करता है।
चीन इस बीमारी पर नियंत्रण की कहता है परन्तु उसकी इस बात में कितनी सार्थकता है कोई नहीं जानता है।
परन्तु यह जरूर पता लग रहा है इटली, स्पेन , की हालत बदतर हो चुकी है।
मौतों का आँकड़ा गुणात्मक रूप में बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी ये देश आखिर क्यों इस त्रास्दी की चपेट में है , कारण है यहाँ के शिक्षित व अचिंतित लोग जो की लॉकडाउन को अवकाश मानकर पिकनिक व् पार्टिया आयोजित कर रहे थे।
आज परिणाम पुरी दुनिया के सामने है।
भारत में लोगो की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है , परन्तु फर्क सिर्फ इतना है यह पर लोग अन्य विकसित देशो की तुलना में अशिक्षित है, परन्तु बीमारी को लेकर चिंतित है, लेकिन उन्हें इससे बचने के उपाय बहुत कम पता है। वे इसे सामान्य बीमारी की तरह ही अपना रहे है।
प्रधानमंत्री राहत कोष व मुख्यमंत्री राहत कोष की स्थापना की जा चुकी है। जनता ने भी सहयोग देना भी शुरू कर दिया है।
इन सभी त्रासदियो को मिलकर व् एकजुटता से ही दूर किया जा सकता है। अत: इसमें अधिक से अधिक सहयोग करे , घर पर रहे। सुरक्षित रहे।
अन्यथा परिणाम भयानक व् आँखों के सामने है।
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धन्यवाद
( कुशाग्र शर्मा )
Good
ReplyDeleteA very good article..
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteSuper
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